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Chirag tale andhera : शिक्षामंत्री के विधानसभा क्षेत्र में उर्दू पढऩे से वंचित हो रहे अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थी

🔮चिराग तले अंधेरा

: शिक्षामंत्री के विधानसभा क्षेत्र में उर्दू पढऩे से वंचित हो रहे अल्पसंख्यक समुदाय के विद्यार्थी
 
स्कूलों में नहीं मिल रही उर्दू की तालीम

संस्कृत पढऩा बन रहा मजबूरी

उर्दू विषय शुरू किए जाने की मांग

एक तरफ शिक्षा मंत्री प्रदेश के सरकारी स्कूलों में अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चों को तृतीय भाषा के रूप में उर्दू पढ़ाए जाने का भी दावा कर रहे हैं तो दूसरी ओर प्रदेश की राजधानी जयपुर के साथ ही खुद शिक्षामंत्री के विधानसभा क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय के बच्चे उर्दू पढऩे से वंचित हो रहे हैं। शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा का कहना है कि ऐसे स्कूल जिसमें न्यूनतम 10 बच्चे किसी भी तृतीय भाषा को पढऩा चाहते हैं उन्हें तृतीय भाषा के रूप में उर्दू या कोई अन्य विषय पढऩे से वंचित नहीं किया जाएगा, लेकिन खुद उनके गृह जिले में स्थिति ठीक इसके विपरीत नजर आ रही है।
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*116 बच्चे उर्दू से वंचित*

केस एक: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खेड़ली राडान, लक्ष्मणगढ़, सीकर में तकरीबन 116 बच्चे अध्ययनरत हैं। इस स्कूल में उर्दू को तृतीय भाषा के रूप में पढ़ाए जाने का इंतजार शिक्षक लंबे समय से कर रहे हैं लेकिन उनका इंतजार खत्म नहीं हो रहा। स्थानीय स्टूडेंट्स के अभिभावकों, सरपंच आदि सभी ने बार बार उर्दू तालीम शुरू करने की मांग की है कि लेकिन अब तक सुनवाई नहीं हुई। ऐसे में मजबूरन विद्यार्थियों को संस्कृत पढऩी पढ़ रही है। स्थानीय नागरिक जाफर खान का कहना है कि इस संबंध में कई बार अधिकारियों को ज्ञापन दिए जा चुके हैं लेकिन कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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*तृतीय भाषा के रूप में उर्दू स्वीकृत नहीं*

केस दो: सीकर के लक्ष्मणगढ़ जिला स्थित शहीद जयपाल सिंह राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय खींवासर में 86 विद्यार्थी अल्पसंख्यक समुदाय के हैं लेकिन सभी संस्कृत पढऩे को मजबूर हैं क्योंकि स्कूल में उर्दू को तृतीय भाषा के रूप में स्वीकृत नहीं किया गया है।
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*उर्दू शुरू करने की मांग*

केस तीन : राजधानी जयपुर में राजकीय प्राथमिक विद्यालय जालुपुरा में पहले उर्दू माध्यम से ही पढ़ाई संचालित की जा रही थी। सभी विषय उर्दू में पढ़ाए जाते थे लेकिन धीरे धीरे इस विषय को समाप्त किया गया। शिक्षकों का कहना है कि अब उर्दू यहां अतिरिक्त विषय के रूप में ही पढ़ाया जाता है। कई बार मांग करने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।

*अधिकांश स्कूलों से उर्दू गायब*

अगर शिक्षामंत्री के विधानसभा क्षेत्र की ही बात करें तो सीकर जिले के लक्ष्मणगढ़ तहसील में 14 सरकारी स्कूल ऐसे में जहां बच्चे तो हैं लेकिन उर्दू नहीं है। कुछ ऐसी ही स्थिति धोद की है। इसी प्रकार राजधानी में झोटवाड़ा में वार्ड 41 स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक स्कूल में 2002 से उर्दू की तालीम दी जा रही थी। स्कूल में उर्दू शिक्षित भी 2002 से वर्तमान तक कार्यरत है लेकिन इस स्कूल को लेवल.प्रथम के तहत सामान्य स्कूल बना दिया गया और कक्षा 1 से 8 तक की उर्दू तालीम पूरी तरह से बन्द कर दी गई। ऐसे में 6 से 8 के भाषायी अल्पसंख्यक समुदाय स्टूडेंट्स तृतीय भाषाउर्दू के स्थान पर संस्कृत पढऩे पर मजबूर हैं। इस संबंध में कई बार उच्च स्तरीय निष्पक्ष जांच की मांग की गई । गत वर्ष तत्कालीन जिला कलेक्टर ने भी जांच के आदेश दिए थे लेकिन उसके बाद कुछ नहीं हुआ। राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ के प्रदेशाध्यक्ष अमीन अली का कहना है कि उर्दूभाषी स्टूडेंट्स को उनके सवँंधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है।

*इनका कहना है,*

शिक्षामंत्री बार बार दावा कर रहे हैं कि उर्दू को तृतीय भाषा के रूप में बंद नहीं किया जाएगा लेकिन उनके विधानसभा क्षेत्र में ही स्थिति ठीक इसके विपरीत है। सीकर में ऐसे स्कूल बड़ी संख्या में हैं जहां अल्पसंख्यक बच्चे अपनी भाषाई तालीम हासिल नहीं कर पा रहे।

अमीन अली कायमखानी, प्रदेशाध्यक्ष

राजस्थान उर्दू शिक्षक संघ

ऐसे स्कूल जिसमें न्यूनतम 10 बच्चे किसी भी तृतीय भाषा को पढऩा चाहते हैं उन्हें तृतीय भाषा के रूप में उर्दू या कोई अन्य विषय पढऩे से वंचित नहीं किया जाएगा।

गोविंद सिंह डोटासरा

शिक्षामंत्री

*कई जगह हुई शुरुआत**

हालांकि शिक्षामंत्री गोविंद सिंह डोटासरा की ओर से निर्देश जारी करने के बाद कई स्कूलों में उर्दू भाषा को तृतीय भाषा के रूप में स्वीकृति दी गई है। नागौर के कुछ स्कूलों में उर्दू भाषा को शुरू किया जा रहा है लेकिन अभी भी काफी स्कूल ऐसे हैं जहां के अल्पसंख्यक विद्यार्थी उर्दू नहीं पढ़ पा रहे हैं। अब देखना यह है कि इन स्कूलों के बच्चों को आखिर कब तक उर्दू में तालीम हासिल करने को मिल पाती है।

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