Skip to main content

Advantages and disadvantages of online study - Advantages and Disadvantages of Online Learning all Mahiti hindi

ऑनलाइन लर्निंग अभी नया है. लोगों को समझने में परिचित होने में समय लगेगा. जिससे ई-लर्निंग के प्रति अविश्वास की भावना ज्यादा है.



इसलिए, गूगल पर रोजाना ऑनलाइन स्टडी के फायदें-नुकसान, pros and cons of online study in hindi, merits and demerits of online learning in hindi आदि.

इस तरह के सवाल पूछे जाते है. मगर, मैं आपको बता दूँ. ई-लर्निंग भविष्य है. मेरी बात ध्यान रखना. अभी तो शुरुआत हुई है. इसलिए, माहौल नहीं बना है.

जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी विकसित होगी, लोगों को फायदें नजर आएंगे, सुविधा मिलेगी तो ऑनलाइन लर्निंग पर भरोसा बन जाएगा.

खैर छोड़ो हम बात करते है ऑनलाइन लर्निंग के फायदें क्या है?

ऑनलाइन स्टडी के फायदें – Advantages of Online Learning in Hindi

#1 सुविधाजनक

ऑनलाइन लर्निंग सुविधाजनक है. आप जहां चाहे, जब चाहे अपने हिसाब से सीख सकते है. आपको क्लासरूम लर्निंग की तरह शेड्यूल फॉलो नहीं करना पड़ता है.

जैसा मैंने ऊपर बताया ई-लर्निंग ई-साधनों पर निर्भर है. तो आप इंटरनेट युक्त किसी भी डिवाइस को अपना क्लासरूम बना पाते है. और जो जगह आपको पसंद आए वहीं से क्लास अटैंड करना भी शुरु कर देते है.

वर्चुअल क्लास अटैंड करना लर्नर्स को खूब पसंद आता है. क्योंकि अब वे पॉपकॉर्न खाते-खाते भी क्लास अटैंड कर रहे होते है. 😊

#2 हर समय उपलब्धता

ई-लर्निंग दिन के 24 घंटे सातों दिन साल के 365 दिन उपलब्ध रहती है. यानि 24x7x365 का फॉर्मूला ई-लर्निंग पर लागु होता है. आपकी क्लास हमेशा क्लाउड पर सेव रहती है.

आपने वेबसाइट या एप खोला लॉगिन किया और सीखना चालु. बस इतनाभर ही करना होता है. आंधी-तूफान, बारिश, गर्मी-सर्दी किसी भी मौसम में सीखना बंद नहीं होता है. अगर, कोई पर्व या उत्सव भी आ जाएं तो भी क्लास लगती रहती है. यानि कोई छुट्टी नही, आप ना चाहे तब.

#3 न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता जरूरी नहीं

अधिकतर ऑनलाइन कोर्सेस में एंरॉल करने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता की बाध्यता नहीं होती. इसलिए, स्टुडेंट्स अपने मन पसंद कोर्स को कर पाते हैं.

मगर इसके विपरीत क्लासरूम लर्निंग में आपको आगे की क्लास लेने या कोई कोर्स विशेष करने के लिए न्यूनतम शिक्षा पूरी करना अनिवार्य होता है. तभी आप कोर्स में एडमिशन लें पाते हैं.

#4 कोर्सेस की विविधता

ऑनलाइन लर्निंग में कोर्सेस की वैरायटी मिलती है. साइंस से लेकर आर्ट्स तक. सेल्फ इम्प्रूवमेंट से लेकर प्रोफेशनल तक. सब प्रकार के कोर्सेस मिल उपलब्ध होते है.

साथ में यूनिवर्सीटिज द्वारा चलाए जाने वाले परंपरागत कोर्सेस भी मिल जाते है. लेकिन, इनकी संख्या बहुत ही कम होती है. केवल चुनिंदा कोर्सेस ही ऑनलाइन ऑफर किए जाते है.

भारत सरकार द्वारा संचालित स्वयं पोर्टल पर आप सैंकड़ों विषयों पर ऑनलाइन कोर्सेस ढूँढ़ सकते है. इसी तरह Udemy Learning Portal पर आपको करीब 1 लाख से ज्यादा कोर्सेस उपलब्ध है.

इन आँकड़ों से ही आप अंदाजा लगा सकते है कि ऑनलाइन लर्निंग में कितनी विविधता है.

#5 समय की बचत

ऑनलाइन लर्निंग का सबसे बड़ा फायदा है – समय की बचत. जी हां. इसलिए, मैं खुद ऑनलाइन सीखना पसंद करता हूँ. और लगभग दर्जन भर कोर्सेस कर चुका हूँ.

आपको सुबह-सुबह तैयार होने, नाश्ता करने, बैग तैयार करने जैसे काम नहीं करने पड़ते है. और ना ही पढ़ाई करने के लिए स्कूल/कॉलेज जाना है.

बस लैपटॉप या मोबाइल उठाया और साइट पर लॉगिन करते ही सीखना चालु. इस समय को आप सीखने में लगा पातें हैं और अपने लिए भी कुछ समय निकाल पातें है. जो क्लासरुम स्टडी में बिल्कुल भी संभव नहीं हो पाता.

#6 रोचक एवं नवीन

ई-लर्निग ज्यादा इंटरेक्टिव होती है. यानि लर्नर्स (आप) का जुड़ाव टीचर (Digicher) से क्लासरूम से ज्यादा होता है और आप पहले से अधिक ध्यान से सीखते हैं.

एक ही टॉपिक को आप विभिन प्रकार से समझ पाते हैं. किसी एतिहासिक घटना को फिल्म के माध्यम से दिखाया जाए तो इतिहास को पढ़ना ऊबाता नहीं है.

क्योंकि स्टडी मैटेरियल बुक्स के अलावा, वीडियो सीडी, ओडियो, ग्राफिक्स आदि माध्यमों में उपलब्ध होता है. इसलिए, सीखना ज्यादा रोचक और मजेदार लगता है.

#7 ई-लर्निंग सस्ती है

परंपरागत शिक्षा के मुकाबले ई-लर्निग बहुत ही सस्ती है. आप मात्र 99 रुपए में भी नई स्किल्स सीख सकते हैं. सैंकड़ो फ्री कोर्सेस उपलब्ध है.

यह सस्ती है मगर हल्की नहीं है.

इसे नजरअंदाज ना करें. आप वो स्किल फ्री में सीख जाते है. जो स्किल्स आपको किसी भी परंपरागत संस्थान में पैसों में भी सीखने को नहीं मिलेगी.कुछ पोर्टल्स पर समय-समय पर डिस्काउंट्स भी ऑफर किए जाते है. तब आप अपन मनपसंद कोर्स बहुत ही सस्ता खरिद सकते हैं.

मैं फिर दोहराता हूँ. सस्ता जानकर इसे नजरअंदाज करने की भूल ना करें.

#8 सभी के लिए अवसर

यह टॉपिक थोड़ा विषय से दूर है. मगर, इसे शामिल करना जरूरी है.

भारतीय संविधान के तहत सभी इंसान समान हैं और उन्हे समान अवसर का अधिकार भी संविधान ने दिया हुआ है.

लेकिन, परंपरागत शैक्षणिक संस्थान अधिकतर अमीर लोगों को ज्यादा तरजीह देते हैं. वहां पर भाई-भतीजावाद चलता है. इसलिए, गरीब तथा प्रतिभावान छात्र अच्छी शिक्षा से वंचित भी रह जाते है.

इस कमी को डिस्टेंस एजुकेशन के माध्यम से पूरा किया जा सकता है. क्योंकि, यहां पर आप ना सिर्फ भारत बल्कि विदेशी युनिवर्सीटिज के कोर्सेस भी घर बैठे-बैठे पूरे कर पाते हैं.

जो छात्र सिर्फ पैसों के कारण अपनी पढ़ाई पूरी नहीं कर पाते हैं. उनके लिए ई-लर्निंग एक वरदान है.

#9 अधिक पहुँच

ऑनलाइन स्टडी की पहुँच बहुत ही दूर तक होती है. जहां स्कूल नहीं पहुँच सकते वहां पर पूरी यूनिवर्सिटी पहुँच जाती है.

गांवों, कस्बों, शहरों से लेकर सुदूर पहाड़ी इलाकों तक में ऑनलाइन एजुकेशन की पहुँच होती है. इसलिए, ऑनलाइन लर्निंग की पहुँच क्लासरूम शिक्षा से बहुत ही ज्यादा होती है.

ये कुछ फायदें मुझे ई-लर्निंग के लगते है. यदि आपको लगता है कि कुछ कमी है तो कमेंट के माध्यम से मुझे जरूर बताएं. ताकि यहां उसे जोड़ सकु.

आइए अब ऑनलाइन स्टडी के नुकसान भी जानते हैं.

ऑनलाइन स्टडी के नुकसान – Disadvantages of Online Learning in Hindi

#1 अनुशासन का अभाव

ऑनलाइन लर्निंग स्टुडेंट्स के अनुशासन को खत्म कर सकती है. क्योंकि, उन्हे रोकने और टोकने वाला कोई नहीं होता है. वे अपनी मर्जी के अनुसार क्लासेस अटैंड करते है.

इसलिए, जिस स्टुडेंट में सेल्फ-डिसिप्लीन की कमी होती है. वह ई-लर्निंग में ज्यादा सफल नही हो पाता है. ई-लर्निंग के लिए बहुत ज्यादा आत्म-प्रेरणा और स्व-अनुशासन की दरकरार होती है.

#2 हर विषय के अनुकूल नहीं

आप प्रैक्टिकल सब्जेक्ट्स जैसे मेडिकल, ज्योग्राफी, लॉ आदि सब्जेक्ट्स को ऑनलाइन नहीं सीख सकते है. इसके लिए तो आपको मैदान में ही आना पड़ेगा.

इसलिए, ऑनलाइन लर्निंग सीमित है. और कुछ ही सब्जेक्ट्स के अनुकूल है.

#3 तकनीक की जानकारी होनी चाहिए

कहते है कि कोई भी मां के पेट से सीखकर नहीं आता है.

फिर भी ऑनलाइन सीखने के लिए लर्नर्स को कुछ बेसिक टेक्नोलॉजी की जानकारि होना अनिवार्य होता है. तभी वे सफलतापूर्वक ई-लर्निंग का पूरा फायदा लें सकते है.

इसलिए, जो भी स्टुडेंट ऑनलाइन स्टडी करना चाहता है उसे पहले डिजिटल साक्षर बनना पड़ता है. तभी वह ऑनलाइन पढ़ाई कर सकता है.
#4 ट्रैनर से सीधा संपर्क नहीं ऑनलाइन पढ़ाई आपके मीलों दूर बैठे शिक्षक द्वारा करवाई जाती है. जिनसे आपकी मुलाकात कभी ही नहीं होती है. आप अपने ट्रैनर से कभी भी नहीं मिल पाते है.

व्यक्तिगत मिलाप की कमी इस क्षेत्र में होती है. इसलिए, कुछ स्टुडेंट्स के लिए यह कम लाभदायक साबित होती है.

#5 पढ़ाई का माहौल नहीं

घर बैठकर पढ़ना. मतलब, खुद को घर के किसी कोने में दुबकाए रखना या फिर कमरे में कैद हुए बैठे रहना.आपको ऑनलाइन क्लास अटैंड करते समय एकांत वातावरण की जरूरत रहती है. इसलिए, आप अकेले ही पढ़ पाते है. आपके सहपाठी अपने स्थान से पढ़ रहे होते है. ऑनलाइन स्डटी में क्लासरूम वाला माहौल नहीं मिलता है.

#6 गुणवत्ता का अभाव

अधिकतर ऑनलाइन एजुकेशन पोर्टल निजी है. और लाभ के लिए चलाए जाते है. इसलिए, अधिक से अधिक कोर्स बेचने तथा तैयार करने पर जोर रहता है.

यहां पर पढ़ाने वाले की योग्यता, विशेषज्ञता की परख नही होती है. और जो जानकारी दी जाती है वह भी स्वयं टीचर द्वारा ही भरी जाती है. इसलिए, कम विश्वसनीय होती है.

इसी छूट और कोर्स निर्माण के मानकों का सार्वजनिक प्रकाशन नहीं होने के कारण ई-लर्निंग पर गुणवत्ता का आरोप हमेशा लगता है. जिससे छुटकारा शायद ही मिले.लेकिन, जितना प्रचार होता है. उससे बहुत ही कम सच्चाई है. ऐसा मेरा मानना है. क्योंकि मैंने ऑनलाइन कोर्सेस करके देखे है. फिर भी मैं यह पूरे विश्वास से नहीं कहुँगा कि ऑनलाइन कोर्सेस क्लासरूम कोर्सेस से बेहतर होते है.

#8 चीटिंग की संभावना

ई-लर्निंग के दौरान स्टुडेंट्स का मूल्यांकन किया जाता है. तब चीटिंग की पूरी संभावना रहती है. ट्रैनर स्टुडेंट्स को चीटिंग करने से नहीं रोक सकते है.

वैसे आजकल बहुत सारे नए टूल्स आ गए है. फिर भी पूरी तरह सुरक्षित होने की गारंटी नहीं ली जा सकती है.

#9 सैद्धातिंक पढ़ाई पर ज्यादा ध्यान

मैंने ऊपर भी बताया कि ऑनलाइन केवल सैद्धातिंक विषयों को पढ़ाया जाता है. आप पैक्टिकल सब्जेक्ट्स ऑनलाइन नहीं पढ़ सकते है.

प्रैक्टिकल के लिए आपको टूल्स, तथा उपकरणों की जरूरत होती है जिन्हे ऑनलाइन उपलब्ध नहीं करवाया जा सकता है.

#10 स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक

लगातार मोबाइल या कम्प्यूटर स्क्रीन को देखते रहना आँखों को बहुत ज्यादा नुकसान पहुँच सकता है.

इसके अलावा कमर दर्द, सिर दर्द, तनाव कुछ सामान्य शारीरिक एवं मानसिक समस्याएं जो ऑनलाइन स्टडी के दौरान हो सकती है.

शारीरिक गतिविधि सीमित हो जाने के कारण स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित होता है.

#11 मूल्यांकन की कमी

अधिक से अधिक स्टुडेंट्स को एडमिशन देने के चक्कर में मूल्यांकन सीमित किया जाता है. अगर किया जाता है तो वह भी Quizzes तथा Surveys तक होकर रह जाता है.

इस तरह के मूल्यांकन से आप किसी भी स्टुडेंट्स की लर्निंग की माप नहीं कर सकते है. ऊपर से चीटिंग का डर तो रहता ही है.

#12 सर्वांगीण विकास पर रोक

ऑनलाइन लर्निंग में आप एक ही जगह सिमट कर रह जाते है. इसलिए, कम्यूनिकेशन स्किल्स, नेतृत्व क्षमता जैसे गुण विकसित नहीं हो पाते हैं.

वह रोबोट की भांति एक आज्ञाकारी बालक की तरह विकसित होना शुरु हो जाता है जो केवल दिए गए निर्देशों का पालन करना सीखता है. ई-लर्निंग सर्वांगीण विकास में बाधा तो है.

#13 मान्यता नहीं

जिन कोर्सेस को खुद युनिवर्सिटी या कॉलेज द्वारा ऑफर करवाया जाता है. केवल वही ऑनलाइन कोर्सेस ही जॉब के लिए मान्य होते है. इनके अलावा अन्य कोर्सेस को मान्यता नहीं है.

इसलिए, Accreditation की समस्या ऑनलाइन लर्निंग पोर्टल्स की सबसे बड़ी कमी है. शायद यहीं कारण है कि भारतीय स्टुडेंट्स ई-कोर्सेस से दूरी बनाए रहते है.
😊 Thanks for Visit.😊

Post a comment

0 Comments